कौड़ियों के मोल

12 05 2011

माना कि लादेन को मारा अमेरिका ने पाकिस्तान में ,
पर देखिये पाकिस्तान के नेता अपनों के साथ वफा तो कर रहें हैं ..

गौर इस बात पे  करने की जरुरत है की हमे अपनों से ही डर है ,
हमे बेवजह ही अमरीका की बहादुरी पे ख़ुशी  से मर रहें हैं..

जो पाकिस्तान में घुस के उसकी सल्तनत का मजाक  उड़ा सकता है ,
वो कुछ भी कर सकता है हमारे देश में,
क्यूंकि यहाँ के नेता देखिये कौड़ियों के मोल बिक रहें हैं …





बेवफा कुते :

12 05 2011

पाकिस्तान को हम देते हैं गाली पर एक बात है उनमे
कि उनके यहाँ आज भी आपस में करते हैं वफा “कुते “,

क्यूँ  अब सांप भी इन्सान के आस्तीन में आने से डरने लगा है ,
और सुरक्षित घर लगने लगे  हैं उन्हें अब कुकुरमुते ,

कुते भी डर रहें हैं आज इंसानों से वफा करने से अब ,
जब से देश की हिफाजत करने वाले इन्सान**  हो गये हैं “बेवफा कुते “,

क्यूँ फेंके जाते हैं हम किसी नेता के ऊपर ,
 बड़े अफ़सोस और  शर्म से  कह रहें थे   आपस में कुछ  जूते ..

** तथाकथित इन्सान





जीने का दिल करता नही पर मौत है कि आती नही ,

9 11 2009

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यादों  का   सहारा  कल  तक  जीने  के   लिए  काफी  था

अब   आँखों   को   नींद  है  कि  आती  नही

अब  जब  गुजरता  हूँ  उन्ही  वादियों   से  फिर  कभी  

जो  हसीं  लगती  थी  कल   तक   वो अब  दिल  को  भाती   नही

 वो  सांसों  कि  गर्मियां  जेहन  मै  भी  हैं  अब  भी बसीं  

पर  अब  क्या  हुआ  जो  धडकने   फिर  से  तेज  हो  जाती  नही

अब  गेसुयों  कि  खुशबू  ख्यालों   मै   तो  हैं   मगर  

क्या  हुआ  जो  अब  वो  गेसू  खुल  के  बिखर    जाती  नही  

वो  छेड़  जाना  नजरों  से  सबसे  नजर  बचा  कर  के  

क्या  हुआ   उन  नजरों  को  , कि  अब   वो  शोखियाँ  आती  नही  

वो  अपलक  देखना  तेरा जब  भी  गुजरना  पास  से  

और  वो  सहेलियों  का  कहना  कि  एक  तू  है  कि  शर्माती  नही  

सबका  पूछना  कि  चेहरे  पे  तो   दीखती  हैं  शुर्खियाँ  तेरे  

और  एक  तू  है  कि हम से कुछ  बताती  नही

अब  भी  करती  हैं  परेशां   बस  वही  मुहब्बत   कि   बातें  

कोशिश  करता  हूँ  बहुत  पर  वो  सरगोशियाँ  भूल  पाती  नही    

भूल  के  ना  भूल  पाया  हूँ  मै  उस  भूल  को  

जीने  का  दिल  करता  नही  पर  मौत  है  कि  आती  नही ,





फूल गुलशन का

4 11 2009

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मै  एक  फूल  हूँ  गुलशन  का,
 जिसे  सब   लोग  सजा  देते  हैं,
हम  खुद   ही   टूट  कर  भी,  
दूसरो  को  मजा  देते  हैं,
हमे  तोड़  कर  लोग  गले  का  हर  बना  लेते  हैं,  
हमे  तोड़ते  हैं  और  निशान  ए  प्यार  बना  देते  हैं,
हम  ही  हैं  जो  कभी  कभी  गुलशन,
 भी  महका  देते  हैं,
लोग  कभी  कभी  हमे  यादों  मै  बसा  लेते  हैं ,
जरा  सुनो  मुझे  तोड़   लेने  वाले,  
रहम  करना  मेरे  उस   माली  पर  भी  ,
जो  हमे   जिन्दगी  देने  के  लिए ,
 अपने  उँगलियों  मै   कांटे  चुभा  लेते  हैं ,
मुझे  शिकायत  है  यह  हर  आने  वाले  से ,
 गुलशन   से  तोड़  गुलदस्ते  क्यूँ  बना  देते   हैं,

 आता  है  जब  घर  मै  कोई  मेहमान  ,
वे  गुलदस्ते  थमा  देते  हैं,

 पूछता  हूँ  मै  जाते  हुए  उस  मेहमान  से ,
बताइए  कि  मेरी  खता  क्या  है  ??
जाते  हुए  किसी  के  घर  से 
 क्यूँ  हम  फूलों  को  ही  पैरों  से  दबा  देते  हैं ???




कल और आज

4 11 2009

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कल  मै  सब के   पास  जाता  था   
 कोई  तो   अपना   बनाएगा  मुझे,  
यही  सोच   साथ  साथ  जाता  था,
जब  होती  थी  नही  फूलों  से  दोस्ती,  
तब  मै  काटों  के  पास  जाता  था,  
कल  मै  अरमानो   की  सीढ़ी  बनाता  था,  
पर  ऍन  मौके  पर  वो  भी  टूट  जाता  था,  
कल  मै  गिरे  हुए  को   उठाता  था,
 पर   वह  भी  मुझे  बैशाखी  थमता  था,
दूसरो    को  हँसाने  के   लिए,    
कल  मै  अपना  गम  छिपाता   था,   
इस  तरह    से   मै  अपना  कल  बिताता  था,  

पर  आज

मै  जब  जब   अकेला  रहना  चाहता  हूँ,  
 ना  जाने    सब  लोग  क्यूँ  मेरे  पास  आते  हैं, 
 मै  जब  कहता  मेरा  अपना  नही  कोई,
आखिर  क्यूँ  सब  लोग  मुझे  अपना  बनाते  हैं,
मैंने  है  कर  ली  आज  काटों  से  दोस्ती , 
तब  फुल  भी  टूटकर  क़दमों  मै   बिखर  जाते  हैं,
आज  मै  गिरना  चाहता  हूँ   फिर   सीढियों  से
तो  सब  लोग  मुझे  क्यूँ  अपने  पलकों  पे  बिठाते  हैं,
आज  चाहता  हूँ  कि  मै  खूब  रोऊँ, 
 हँसाने  के  लिए  फिर  क्यूँ  मुझे  गुदगुदाते  हैं,

 आज   जब   चाहता  हूँ  मै   बैशाखी  का  सहारा,  
तो   फिर  लोग  क्यूँ  मेरे  कंधे  से  कन्धा  मिलते  हैं
पर  एक   बात  है  , जो  कल  यादों   मै  आते  थे   
 वे  कल   भी  रुलाते  थे  और  अब  भी   रुलाते  हैं
पर  अकसर  होता     है 
मेरे  साथ  ही  ऐसा  क्यूँ?

 
जब  मै  अपना  आज  बिताता  हूँ,
  तो  लोग  अपना  कल  बिताते  हैं .





चिराग एक कब्र का

4 11 2009

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मै  आज  खडा  हूँ  जिस  कब्र  पर  
वह   कब्र  किसी    देश  के   सिपाही  का  है  
यह  एक  तोहफा  गैरों  के  तबाही  का  है
यह  जो  चिराग  इसके  पास  जल  रहा  है
 आते  जाते  हर  रूह  को   ये  बता  रहा  है  
यह  मजार  भी  किसी  महबूब  के  माही    का  है

 कह  रहा   है  यह  पास  आने  वाले    हर  राहगीर  से
कभी  भी  मेरी  याद  मै  आंसू  ना  बहाना  
गर  हो  सके  तो  देश  के  वास्ते  एक  कतरा  खून  बहा   जाना
कहता  है  इससे  बढ़  के   क्या  कुछ  और  होता  है
 अरे  हर   आदमी  ही  तो  देश  का  सिरमौर  होता  है




मै क्यूँ किसी को अपना नही बनाता ??

23 10 2009

tropical_sunsetमै  किसी  को   कभी  अपना  नही  बनाता
सब  पूछते   हैं  पर  मै  बता  नही  पता

सबसे  पहले  मैने  मिटटी  का  घरोंदा  बनाया  था
उसे  मैने  बगीचे  के  फूलों  से  सजाया  था 
तभी  कुछ  देर  बाद  ही  बरसात  हो  गयी  थी 
मेरी  मिटटी  की  गुडिया  बर्बाद  हो  गयी  थी  

फिर  मैने  लकडी  का  एक  मंदिर  बनाया  था 
मैने  उसमे  घी  का  दीपक  जलाया  था  
तभी  हवा  के  झोंके  से  उसमे  आग  लग  गयी  थी
मेरे   अरमानो  की  मंदिर   जलकर  खाक  हो   गयी  थी 

पर  फिर  भी  मैने  कभी  भी  हार  नही   मानी
इस  बार  मैने  एक  बडी  बात  ठान  ली 

मैने  सफ़र  के  एक  राहगीर  को  साथी  बनाया 
उसने  मुझे  अपनी  बारात  में  बुलाया  
वहा  पहुंच  कर  मै  फिर  हाथ  मल  रहा  था 
बारात  के  जगह  पर   उसका  जनाजा  निकल  रहा  था  

क्या  आप  फिर  भी  कहेंगे  कि  मुझे  अपना  बनाइए
मै  कहता  हूँ  इसलिए  मुझे  अकेला  छोड़  जाइये  
मै  इसलिए  किसी  को  कभी  अपना  नही  बनाता 
और  सफ़र  पर  मै  अपने  अकेला  ही  निकल  जाता  ——————–








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